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NATIONAL HIGHWAYS & INFRASTRUCTURE DEVELOPMENT CORPORATION LTD.
Ministry of Road Transport & Highways, Government of India
 

संगठन, उसके कार्यों एवं कर्तव्यों का विवरण

i) परिचय


राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) की स्थापना कम्पनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के रूप में उत्तर पूर्वी क्षेत्र एवं देश की अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर स्थित रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में राष्ट्रीय राजमार्गों और अन्य अवसंरचना के निर्माण में तेजी लाने के उद्देश्य से, अन्य बातों के साथ-साथ, 10 करोड़ रुपए की अनुमोदित शेयर पूंजी और 01 करोड़ रुपए की चुकता पूंजी के साथ 18 जुलाई, 2014 को की गई थी। इस पहल का उद्देश्य यह है कि इन क्षेत्रों के लोगों को बेहतर तरीके से मुख्यधारा में सम्मिलित करने के साथ-साथ समग्र आर्थिक लाभ यहां की स्थानीय जनता तक पहुंचें जिससे ये क्षेत्र आर्थिक दृष्टि से सुदृढ़ हो सकें। 22 सितम्बर, 2014 से कम्पनी में श्री आनंद कुमार, भा.प्र.से. (केएल:1984) एवं श्री संजय जाजू, भा.प्र.से. (टीएस:1992) की क्रमश: प्रबंध निदेशक तथा निदेशक (प्रशासन एवं वित्त्) के रूप में पहली नियुक्तियों के साथ ही कम्पनी के प्रभावी कार्यकरण की शुरूआत हो गई।
एनएचआईडीसीएल को लगभग 10,000 किलोमीटर की कुल लम्बाई के सड़क सम्पर्कों का विकास और उनमें सुधार करने का काम सौंपा गया है जिसमें पूर्वोत्तर में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार गलियारा और उत्तर बंगाल तथा भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में 500 किलोमीटर लम्बी सड़कों का निर्माण शामिल है। इससे दक्षिण एशिया उप-क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग (एसएएसईसी) के अन्य सदस्य देशों के साथ क्षेत्रीय स्तर पर दक्षतापूर्ण और सुरक्षित परिवहन की व्यवस्था हो सकेगी और और भारत की अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा में सहायता के साथ-साथ सीमा पारीय व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा मिलेगा।
कम्पनी द्वारा भौगोलिक प्रदेश की जटिलताओं जैसे मुद्दों का समाधान करने और सुरक्षा अभिकरणों के साथ समन्वय संबंधी व्यापक अपेक्षाओं को पूरा करने की दृष्टि से आवश्यकतानुरूप और विशेषीकृत कौशल निर्माण की परिकल्पना की गई है। कम्पनी उन अवसरंचना परियोजनाओं का निर्माण कार्य हाथ में लेने और समस्त प्रकार का अवसंरचना विकास करने वाले अभिकरण के रूप में कार्य करने का प्रयास करेगी जिनमें शहरी अवसंरचना तथा शहरी अथवा नगरीय परिवहन तो शामिल होगा ही परंतु यह उसी तक सीमित नहीं होगा । कम्पनी द्वारा बहुपक्षीय संगठनों और संस्थाओं सहित अन्य राष्ट्रों और उनके अभिकरणों के साथ तकनीकी जानकारियां साझा करने और व्यवसाय विकास हेतु अवसरों में वृद्धि करने की परिकल्पना की गई है।

ii)  संगठनात्मक संरचना

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